खलीलाबाद की फैक्ट्रियों में राष्ट्रीय अवकाश के दिन काम कराने पर उठे सवाल, श्रम विभाग से जांच की मांग
16 अगस्त 2026·सूर्य प्रकाश पाण्डेय·4 मिनट में पढ़ें

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संतकबीरनगर। स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त 2026, जो उत्तर प्रदेश के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में निर्धारित राष्ट्रीय अवकाश है, उसी दिन खलीलाबाद के औद्योगिक क्षेत्र में स्थित कुछ फैक्ट्रियों में श्रमिकों से काम कराए जाने की शिकायत सामने आई है। आरोप है कि कई श्रमिकों को राष्ट्रीय अवकाश के दिन ड्यूटी पर बुलाया गया और उनसे करीब 12 घंटे तक कार्य कराया गया, जबकि इसके बदले उन्हें केवल एक दिन का सामान्य वेतन दिया गया।
श्रमिकों से जुड़े इस मामले ने औद्योगिक क्षेत्र में श्रम कानूनों के अनुपालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि संबंधित फैक्ट्रियों के नाम, कर्मचारियों की संख्या, उपस्थिति एवं वेतन अभिलेख तथा वास्तविक कार्य-अवधि की आधिकारिक जांच अभी बाकी है, इसलिए मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जाना चाहिए।
राष्ट्रीय अवकाश पर काम कराने के लिए क्या है कानून?
उत्तर प्रदेश औद्योगिक अधिष्ठान (राष्ट्रीय छुट्टी) अधिनियम, 1961 की धारा 3 के अनुसार प्रत्येक कर्मचारी को 15 अगस्त सहित राष्ट्रीय अवकाश पर वेतन सहित अवकाश दिया जाता है। यदि औद्योगिक प्रतिष्ठान की व्यावसायिक आवश्यकता के कारण किसी कर्मचारी को राष्ट्रीय अवकाश के दिन काम करना पड़ता है और वह काम करता है, तो कर्मचारी को एक दिन के वेतन की दोगुनी दर से भुगतान किया जाना चाहिए।
वैकल्पिक रूप से कर्मचारी की पसंद पर उस दिन का वेतन तथा अगले कैलेंडर माह में सवेतन प्रतिस्थापित अवकाश दिया जा सकता है।
इसलिए यदि किसी श्रमिक से 15 अगस्त को काम कराया गया और उसे केवल सामान्य एक दिन का वेतन ही दिया गया तथा न तो वैधानिक दोगुना भुगतान किया गया और न ही कर्मचारी को वैधानिक विकल्प के अनुसार प्रतिस्थापित सवेतन अवकाश मिला, तो यह स्थिति श्रम विभाग की जांच का विषय बनती है।
तीन दिन पहले सूचना और श्रमिक की लिखित पसंद भी महत्वपूर्ण
उत्तर प्रदेश औद्योगिक अधिष्ठान (राष्ट्रीय छुट्टी) नियम, 1965 के नियम 4 के अनुसार, राष्ट्रीय अवकाश के दिन काम कराने की स्थिति में नियोक्ता को सामान्यतः संबंधित कर्मचारी को कम से कम तीन दिन पहले सूचना देनी होती है। कर्मचारी से लिखित रूप में यह विकल्प भी लिया जाता है कि वह दोगुना वेतन लेना चाहता है अथवा सवेतन प्रतिस्थापित अवकाश। नियमों में निरीक्षक को भी निर्धारित प्रपत्र में सूचना देने का प्रावधान है।
12 घंटे काम कराने का मामला भी जांच के दायरे में
मामले का दूसरा गंभीर पहलू कथित 12 घंटे की ड्यूटी है। 21 नवंबर 2025 से Occupational Safety, Health and Working Conditions Code, 2020 लागू है। इसकी धारा 25 के तहत सामान्य रूप से किसी प्रतिष्ठान में कर्मचारी से 8 घंटे प्रतिदिन से अधिक कार्य नहीं कराया जाना चाहिए, जबकि धारा 27 में निर्धारित सीमा से अधिक कार्य के लिए ओवरटाइम का भुगतान सामान्य वेतन दर की दोगुनी दर से किए जाने का प्रावधान है। ओवरटाइम के लिए कर्मचारी की सहमति का भी प्रावधान है।
केंद्र सरकार के मार्च 2026 के आधिकारिक FAQ में भी स्पष्ट किया गया है कि आठ घंटे से अधिक दैनिक कार्य या 48 घंटे से अधिक साप्ताहिक कार्य की स्थिति में संबंधित ओवरटाइम के लिए सामान्य वेतन की दोगुनी दर से भुगतान किया जाना है।
जांच में इन अभिलेखों की पड़ताल जरूरी
श्रमिकों के हित में श्रम विभाग/संबंधित निरीक्षण अधिकारी द्वारा संबंधित फैक्ट्रियों के निम्न अभिलेखों की जांच की जानी चाहिए—
15 अगस्त 2026 की Attendance/Muster Roll
Duty Roster एवं Shift Register
Wage Register एवं वेतन भुगतान का रिकॉर्ड
Overtime Register
15 अगस्त को काम करने वाले श्रमिकों की सूची
राष्ट्रीय अवकाश पर काम कराने की पूर्व सूचना
श्रमिकों से प्राप्त लिखित विकल्प
श्रम निरीक्षक को भेजी गई निर्धारित सूचना
राष्ट्रीय अवकाश रजिस्टर
संबंधित अवधि के CCTV फुटेज
यदि CCTV रिकॉर्ड उपलब्ध है तो उसे सुरक्षित रखकर यह भी जांचा जाना चाहिए कि 15 अगस्त को वास्तव में कितने श्रमिक फैक्टरी में उपस्थित थे और उन्होंने कितने घंटे कार्य किया।
गरीब मजदूरों के हक का सवाल
दिहाड़ी एवं कम वेतन पर काम करने वाले श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय अवकाश और ओवरटाइम का भुगतान महज कागजी औपचारिकता नहीं है। उनके परिवार की आय सीधे उनके मेहनताने पर निर्भर रहती है। ऐसे में यदि किसी श्रमिक ने राष्ट्रीय अवकाश के दिन काम किया है तो उसे कानून के तहत मिलने वाले आर्थिक लाभ से वंचित किया जाना गंभीर विषय है।
श्रम विभाग करे निष्पक्ष जांच
श्रमिकों से जुड़े इस मामले में मांग है कि संतकबीरनगर श्रम विभाग खलीलाबाद औद्योगिक क्षेत्र में 15 अगस्त 2026 को संचालित रही फैक्ट्रियों का आवश्यकतानुसार निरीक्षण करे और अभिलेखों का मिलान वास्तविक स्थिति से कराए।
यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि राष्ट्रीय अवकाश के दिन श्रमिकों से काम कराया गया और उन्हें कानून के अनुसार भुगतान/प्रतिस्थापित सवेतन अवकाश नहीं दिया गया, अथवा निर्धारित कार्य-अवधि से अधिक काम कराने के बावजूद वैधानिक ओवरटाइम भुगतान नहीं किया गया, तो संबंधित नियोक्ता के विरुद्ध लागू श्रम कानूनों के अनुसार कार्रवाई और श्रमिकों को देय भुगतान दिलाने की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।