सपा के जिला अध्यक्ष पद की योग्यता रविन्द्र राय में किसी से कम नहीं
27 सितंबर 2026·सूर्य प्रकाश पाण्डेय·3 मिनट में पढ़ें

विज्ञापन
संतकबीरनगर। तीन दशकों से निष्ठा, संघर्ष और समाजवादी विचारधारा के साथ चट्टान की तरह खड़ा रहने वाले रविन्द्र राय का नाम समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष पद पर सटीक बैठता है क्योंकि जब उन्होंने समाजवादी पार्टी का झंडा थामा था, तब राजनीतिक परिस्थितियां आज से बिल्कुल अलग थीं। उस समय न पद की लालसा थी, न सत्ता की इच्छा और न ही किसी व्यक्तिगत लाभ की अपेक्षा। उनके सामने केवल समाजवादी विचारधारा, संघर्ष और संगठन के प्रति निष्ठा थी । पार्टी के संस्थापक अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के विचारों और संघर्षों से प्रेरित होकर श्री राम समाजवादी पार्टी के साथ अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और लगभग तीन दशक बाद आज भी उसी विचारधारा और उसी निष्ठा के साथ पार्टी के लिए समर्पित हैं। यह केवल 30 वर्षों का समय नहीं है। बल्कि यह संघर्ष के 30 वर्ष हैं यह निष्ठा के 30 वर्ष हैं।यह ईमानदारी के 30 वर्ष हैं।यह समर्पण के 30 वर्ष हैं।
विपरीत परिस्थितियों में भी घर पर समाजवादी झंडा लहरा रहा है और समाजवादी पार्टी का यह झंडा लगाने और उसके लिए संघर्ष करने का साहस उन्होंने उस समय दिखाया था, जब क्षेत्र में राजनीतिक परिस्थितियां समाजवादी पार्टी के अनुकूल नहीं थीं और चारों ओर विपक्षी राजनीतिक माहौल था।
कई बार परिस्थितियां ऐसी आईं जब रास्ता बदलना श्री राय के लिए आसान था, लेकिन उन्होंने रास्ता बदलने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। उन्होंने सत्ता देखकर झंडा नहीं चुना, बल्कि विचारधारा देखकर झंडा चुना था तमाम
सरकारें आईं और गईं, लेकिन श्री राय की निष्ठा नहीं बदली ।मायावती की बसपा सरकार का दौर हो या योगी आदित्यनाथ की भाजपा सरकार —लगातार बदलती राजनीतिक परिस्थितियों में श्री राय को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
उनके ऊपर मुकदमे हुए, दबाव बनाए गए और राजनीतिक रूप से कमजोर करने तथा तोड़ने के प्रयास हुआ।
लेकिन इन परिस्थितियों ने उनकी निष्ठा को कमजोर नहीं किया। उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी।विचारधारा नहीं छोड़ी।सिद्धांतों से समझौता नहीं किया।लेकिन उन्होंने तब भी समाजवादी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा।
उनके लिए राजनीति सुविधा का रास्ता नहीं, बल्कि संघर्ष और सिद्धांतों का रास्ता रही है।टिकट किसी और को मिला, फिर भी पूरी ताकत से चुनाव लड़ाया
राजनीतिक जीवन में ऐसे अनेक अवसर आए जब समाजवादी पार्टी ने किसी दूसरे साथी को टिकट दिया।लेकिन कभी इसे व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का प्रश्न श्री राय ने नहीं बनाया।जिसे पार्टी ने प्रत्याशी बनाया, उसे उन्होंने अपना प्रत्याशी माना और उसे जिताने के लिए तन-मन-धन से पूरी ताकत लगाई।क्योंकि श्री राय के लिए—व्यक्ति से बड़ा संगठन है,संगठन से बड़ी विचारधारा है,और विचारधारा से बड़ा समाज है। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि टिकट क्यों नहीं मिला बल्कि हमेशा यही सोचा कि पार्टी का प्रत्याशी जीते और समाजवादी विचारधारा मजबूत हो।
पद और पैसे का लालच कभी नहीं किया
आज के राजनीतिक दौर में जब कई लोग कुछ पैसों, पद, टिकट या सत्ता के लिए अपनी राजनीतिक निष्ठा और विचारधारा बदल लेते हैं, वहीं श्री राय पूरी राजनीतिक यात्रा में इन चीजों को अपनी निष्ठा से ऊपर नहीं रखा और कभी अपने लिए पद को राजनीति का उद्देश्य नहीं बनाया और कभी धन का लालच नहीं किया तथा कभी टिकट के लिए विचारधारा से समझौता नहीं किया। कभी सत्ता के लिए अपना रास्ता नहीं बदला और राजनीति व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं, बल्कि विचारधारा, संगठन और समाज के लिए रही है।हर जाति, हर धर्म और हर वर्ग के लिए काम किया।
हमेशा राजनीति को किसी एक जाति, धर्म या वर्ग तक सीमित रखने के बजाय समाज के हर वर्ग के लिए काम करने का प्रयास किया।